Monday, September 30, 2013

अब ...क्या कहें


प्यार क्या है , क्या कहें
तकरार क्या है , क्या कहें

राह सूनी, ना पैगाम कोई  
इंतज़ार क्या है , क्या कहें

हैं ना वो, ना तस्वीर उनकी
दीदार क्या है, क्या कहें

थोड़ी फकीरी , है मुफ़लिसी भी
बाज़ार क्या है, क्या कहें

दुश्मन नहीं, ना दोस्त कोई
तलवार क्या है, क्या कहें

दिल में दर्द, है सर भी भारी
बीमार क्या है, क्या कहें

घर नहीं, ना शहर कोई
दीवार क्या है, क्या कहें

जुबां कहती, निगाहें चुप हैं
इज़हार क्या है, क्या कहें

हर गली बस बैर मिलता
प्यार क्या है, क्या कहें 
......रजनीश (30.09.13)

Friday, September 27, 2013

क्यूंकि हम हैं ...












एक अंकुर फूटा
और एक पौधे ने ली अँगड़ाई
एक कली खिली
अब खिल गई
सो खिल ही गई
एक पौधा निकल ही आया
बीज से बाहर

पौधा अब वापस बीज में
कभी नहीं जाएगा
बीज अब बीज रहा भी नहीं
बीज का यूं ना होना
पौधे के होने में समा गया

अब  है एक ही रास्ता
पौधे के पास
अब हवा में झूमे
धूप ले पानी पिये
और ऊपर उठता जाए
बाहें फैलाये ,
बस बढ़ता ही जाए
और बन जाए एक पेड़

एक पेड़
जो बदलता  पल पल
पर रहता है एक पेड़
अपने होने तक ,

हर पेड़ की अलग ऊँचाई
अलग चेहरा अलग चौड़ाई
पर सबका एक दायरा
वक्त में भी और वजूद में भी
पर बीज से ही बनता है हर पेड़
और बनता है सिर्फ पेड़ ही ,


गर कुछ पत्ते ज्यादा हों
बड़ें हो पत्ते फैली हों डालियाँ
कुछ तने अधिक मोटे
सुंदर फूल हों या लगे हों कांटे
पर पेड़ होता है सिर्फ पेड़
और कुछ नहीं
क्यूंकि पेड़ , पेड़ ही हो सकता है

होता है पेड़ झुंड में या अकेला
पर देखो आसमान से
तो कोई एकाकी नहीं
पेड़ों से भरी पड़ी है धरा

एक पेड़ का पूरा जीवन
समाया है सांस लेता है
निर्जीव से दिखते एक बीज में,
अगर बीज बोया नहीं
तो एक पेड़  नहीं बन पाता कभी पेड़
बीज एक गुल्लक है
जिसमें होते है समय के सिक्के
जीतने सिक्के उतना समय
 गुल्लक का फूटना  है जरूरी

एक बीज नहीं तो पेड़ नहीं
पेड़ नहीं तो बीज भी नहीं
पर इस चक्र में ही है जीवन
पेड़ और बीज नहीं
तो धरा , धरा नहीं

हर पेड़ बीज नहीं देता
हर बीज नहीं बन पाता पेड़
पर हर बीज और हर पेड़
एक संभावना है होने की
और संभावना है तो है जीवन
बस होना ही  है सब कुछ
मैं यहाँ हूँ , तुम हो  यहाँ
हमारा यहाँ होना ही है सब कुछ
 जब तक हम हैं
तो  खत्म नहीं होती संभावना
और जब तक हम होते हैं
हम ख़त्म नहीं होते
हमारे होने में है सब कुछ
और बस हमारे यहाँ होने में,

तो मनाओ उत्सव यहाँ होने का
क्यूंकि मैं हूँ यहाँ
तुम हो यहाँ
हम हैं यहाँ
हम हैं ...
रजनीश ( 27.09.2012)
(अपने ही जन्म दिवस 27 सितंबर पर )
re-post 27.09.13

Sunday, September 8, 2013

प्यार की चाह में

गर प्यार हो दिल में
हर पल सुहाना होता है
प्यार की चाह में
हर दिल दीवाना होता है

उनके दीदार को
तरसती हैं हरदम आँखें
करीब उनके चले जाने 
हरदम एक बहाना होता है

उनके लब हिलते हैं
तो फूल खिलते है
उनका हर लफ़्ज़
एक तराना होता है

प्यार पर सिर्फ़
गेसूओं की छाँव नहीं
दूर रहकर भी
प्यार निभाना होता है

प्यार देने में है असल
पाने की सिर्फ़ चीज़ नहीं
प्यार खुशियाँ लुटाना
आँसू पी जाना होता है

गर प्यार हो दिल में
हर पल सुहाना होता है
प्यार की चाह में
हर दिल दीवाना होता है 

......Rajneesh (08.09.2013)

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