Sunday, May 20, 2018

मंजिलें और खुशियाँ

जिंदगी के सफर में
मंजिल दर मंजिल
एक भागमभाग
में लगा हुआ
हमेशा हर ठिकाने पर
यही सोचा
कि क्या यही है वो मंजिल
जिसे पा लेना चाहता था
पर मंजिल दर मंजिल
बैठूँ कुछ सुकून से
इसके पहले ही
हर बार
मिल जाता है
एक नया पता
अगली मंजिल का
अब तक के सफर में
कई कदम चलने
कई जंग लड़ने
वक्त के पड़ावों को
पार करते करते
खुद को  भुला
मंजिलों का पीछा करने के बाद
अब सोचता हूँ
आखिर  मंजिलें है क्या
रुकता त़ो हूँ नही उनपर
वक्त तो रस्ते में ही गुजरता है
इसलिये अब
मंजिलों में खुशियाँ तलाशना छोड़
रस्ते की ओर देखता हूँ
और पाया है मैने
कि सारी खुशियाँ तो
रस्ते पर ही बिखरी पड़ी हैं
जबसे इन पर नजर पड़ी है
इन्हें  ही बटोरने में लगा हूँ
और अब हालात ये हैं
कि ख्याल ही नहीं रहा
मंजिलों का,
सफर बदस्तूर जारी है !
.....रजनीश (20.05.18)

10 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस - सुमित्रानंदन पंत और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. मंजिलों में खुशियाँ तलाशना छोड़
    रस्ते की ओर देखता हूँ
    और पाया है मैने
    कि सारी खुशियाँ तो
    रस्ते पर ही बिखरी पड़ी हैं
    जबसे इन पर नजर पड़ी है
    इन्हें ही बटोरने में लगा हूँ
    और अब हालात ये हैं
    कि ख्याल ही नहीं रहा
    मंजिलों का,
    सफर बदस्तूर जारी है !
    अत्यंत सुंदर !

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  3. बहुत सुंदर..जब रास्ते ही मंजिलों का पता देने लगते हैं..तब जीवन वर्तमान में जीने की कला आ जाती है

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  4. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 22/05/2018 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    ReplyDelete
  5. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 22/05/2018 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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  6. खुशियां मंजिलों में नहीं राहों में बिखरी पड़ी हैं....
    बहुत सटीक...
    वाह!!!

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  7. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 23मई 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!


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  8. चलते रहने का नाम है जिंदगी और
    खुशियां रस्तों पर पड़ी है बटोरते चलो।

    खूबसूरत रचना।

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  9. सहमत की मंज़िल तो एक पड़ाव है दूसरी मंज़िल तक जाने के लिए ।.. महत्वपूर्ण तो रास्ता है जिसपर जीवन गुज़र जाता है ... सुंदर रचना है ...

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  10. वाह ! क्या बात है ! मंज़िलों का ख्याल नहीं ! सफ़र जारी है ! बहुत खूब आदरणीय ।

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टिप्पणी के लिए धन्यवाद ... हार्दिक शुभकामनाएँ ...