रजनीश का ब्लॉग
Friday, December 31, 2010

पोर्ट्रेट-2

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साँस ले रही थी, कल देखी, एक पुरानी ज़िंदगी...   फुट पाथ पर , दीवार सहारे , भरी दुपहरी, धूप में तपती , बरसों से बेख़बर पड़ी थी एक प...
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Tuesday, December 28, 2010

हस्तरेखा

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रेखा -ओ- रेखा , मैंने तुझको देखा...... तू धारा है इक नदिया की निकली तू मणिबंध से और पहुँच गयी अनामिका तक-पर   है क्यूँ  तू कटी-फटी ? र...
Monday, December 27, 2010

पोर्ट्रेट-1

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आइनों सी टाइल्स  पर पड़ती बड़े फानूसों की  रोशनी में, उसका प्रतिबिंब नज़र आया मुझे , लकड़ी से बनी एक डिज़ाइनर कुर्सी पर उसे बैठे देखा था ......
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Tuesday, December 21, 2010

लम्हे

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आपकी याद में जिये जाएँ , गुजरे लम्हों को हम पिये जाएँ । उन लम्हों की वफ़ा कम न हुई , आज भी उतने ही अपने है, मेरे । इस अपनेपन म...
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कुछ अपने बारे में

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रजनीश तिवारी
इलेक्ट्रिकल इंजीनियर....लिखता हूँ ...फोटोग्राफी भी .... ब्लॉग के माध्यम से मेरी कविताएं पहुँचती हैं आप तक ...
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