Friday, December 31, 2010
पोर्ट्रेट-2
›
साँस ले रही थी, कल देखी, एक पुरानी ज़िंदगी... फुट पाथ पर , दीवार सहारे , भरी दुपहरी, धूप में तपती , बरसों से बेख़बर पड़ी थी एक प...
7 comments:
Tuesday, December 28, 2010
हस्तरेखा
›
रेखा -ओ- रेखा , मैंने तुझको देखा...... तू धारा है इक नदिया की निकली तू मणिबंध से और पहुँच गयी अनामिका तक-पर है क्यूँ तू कटी-फटी ? र...
Monday, December 27, 2010
पोर्ट्रेट-1
›
आइनों सी टाइल्स पर पड़ती बड़े फानूसों की रोशनी में, उसका प्रतिबिंब नज़र आया मुझे , लकड़ी से बनी एक डिज़ाइनर कुर्सी पर उसे बैठे देखा था ......
1 comment:
Tuesday, December 21, 2010
लम्हे
›
आपकी याद में जिये जाएँ , गुजरे लम्हों को हम पिये जाएँ । उन लम्हों की वफ़ा कम न हुई , आज भी उतने ही अपने है, मेरे । इस अपनेपन म...
2 comments:
‹
›
Home
View web version