Wednesday, October 28, 2015
कुछ क्षणिकाएँ..
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[1] है आँखों में नमी, हुई मानसून में कमी अल-निनो की करतूत, है सूखी सी जमीं [2] आगे बढ़ो मत भूलो हुए बापू शास्त्री यहीं कुछ करो विरास...
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Sunday, October 25, 2015
नज़र
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ना बदली वो राहें पता मंजिल का भी वही फिर क्यूँ भटका हुआ इन्सान नज़र आता है कोई नजरों में रहके भी नजरों से द...
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Thursday, October 22, 2015
नवरात्रि और दशहरा
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दशहरा [1] जल जाएगा रावण मिट जाएगा अंधेरा अहंकार को जीत कर मनाओ दशहरा [2] इन्सानियत को थोड़ा बहलाने के लिए एक झूठा भरोसा दिलाने ...
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Sunday, October 18, 2015
अक्टूबर के महीने में
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[1] डांस-बार फिर खुले अगर वही होगा जो पहले देखा श्लील-अश्लील के बीच कहाँ पर खींचें लक्ष्मण-रेखा [2] कल के सपने बुन रहा है...
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