Friday, April 29, 2011
कुछ बातें
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[1] क्यूँ ढूंढते हो गॉड पार्टिकल कृत्रिम वातावरण में, जबकि गॉड तो हर पार्टिकल में है । [2] तुम खोज लेते हो कोई एक नेता क्यूंकि तुम...
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Tuesday, April 26, 2011
गुलमोहर और पलाश
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रोज गुजरता हूँ इधर से वही रास्ता हर दिन जैसे एक चक्कर में घूमती जिंदगी, और मिलता है वही पलाश जो इतराता था कल तक अपने मदमस्त फूलों प...
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Sunday, April 24, 2011
एक नकली फूल
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मत करो नकली फूल से नफ़रत मैंने तो उसे एक, अमिट याद सा दीवार पे लगाया है , ये कब से है वैसा का वैसा , असली फूल तो कुछ पल का साथी है, ...
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Friday, April 22, 2011
शीर्षक
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अगर कोई शीर्षक ना दिया होता तो क्या तुम इसे नहीं पढ़ते ? और अगर पढ़ लेते फिर जरूरत ही क्या तुम्हें शीर्षक की ? क्या तुम तय करते हो इस...
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