Thursday, July 26, 2012
मैं जानता हूँ सब कुछ, फिर भी ...
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मैं जानता हूँ मेरी चंद ख़्वाहिशों के रास्ते नक़्शे पर दिखाई नहीं देते , मैं जानता हूँ मेरे कुछ सपनों के घरों का पता किसी डाकिये...
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Wednesday, July 18, 2012
घूमता पंखा
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मेज पर बिछे काँच में देखता हूँ घूमते पंखे की परछाई नहीं दिखती थकान मुझे उसके चेहरे पर एकबारगी से पर देखा जब गौर से तो हुआ एहसास उसक...
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Wednesday, July 11, 2012
दो दुनिया का वासी
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मैं हूँ दो दुनिया का वासी एक जहां है सभी असीमित दूजे में जीवन लख-चौरासी मैं हूँ दो दुनिया का वासी ... एक जहां तुमसे मिलता हूँ ...
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Sunday, July 8, 2012
दिन का बुलावा
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हर दिन है एक निमंत्रण एक यात्रा का हर दिन बढ़ाकर हाथ कहता है चलो कभी नींद की ख़ुमारी में कभी आलस और कभी सड़कों पर होते हल्ले में द...
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