रजनीश का ब्लॉग
Wednesday, March 13, 2013

झूठे सपनों के पार

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है सूरज निकल पूरब से  जाता हर रोज़ पश्चिम की ओर पानी लिए नदियां हर पल हैं मिलती रहती सागर में बादल बरस बरस कर करते र...
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Sunday, March 3, 2013

खेल इंसान का

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राह तो बस राह है  उसे आसां या मुश्किल बनाना   इंसान का खेल है  तकदीर तो बस तकदीर  है  उसे बिगाड़ना या  बनाना  इंसान का खेल ...
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Tuesday, February 26, 2013

एक ख़ोज

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सपनों की फेहरिस्त लिए   रोज़ चली आती है रात   गुजार देते है उसे , ढूंढते   फेहरिस्त में अपना सपना   कुछ तारों को तोड़ रात   ...
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Tuesday, February 19, 2013

सवाल....ये है कि

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सवाल....इस बात का है कि हर बात पर क्यूँ है एक सवाल सवाल ....ये बड़ा है कि क्या है सबसे बड़ा सवाल सवाल ....ये उठता है क...
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कुछ अपने बारे में

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रजनीश तिवारी
इलेक्ट्रिकल इंजीनियर....लिखता हूँ ...फोटोग्राफी भी .... ब्लॉग के माध्यम से मेरी कविताएं पहुँचती हैं आप तक ...
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