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Sunday, January 8, 2012

शुरू हुआ एक साल


शुरू हुआ एक साल नया 
बीती हैं कुछ ही रातें  
सड़कें घर सब भीगे भीगे 
रह रह होती बरसातें 

है मौसम भूला  राह 
दबा उत्साह क्या होगा आगे 
 अन्ना दिशा गए भूल 
छुपाए शूल इक रस्ता मांगे 

शुरू हुआ एक साल नया 
लाया चुनावी हलचल 
नेता भटकेंगे गली गली 
करेंगे सबकी मान-मुनव्वल 

होगा सब कुछ वही 
बात है सही काहे का रोना 
पर लगे रहो  मुन्ना भाई 
 नहीं है बुराई , अब न सोना 

शुरू हुआ एक साल नया 
 अंदर-बाहर का खेल 
कोई फंसा भंवरी के भंवर में 
बड़े नित जाते जेल 

सोच अपनी  है यही 
बात है सही उदास न रहना 
बन जाएगी तक़दीर 
है गर तदबीर प्रेम तुम सबसे करना ...
...रजनीश (08.01.2012)
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