बरसन लागी बदरिया रूम झूम के ....
( ये बोल हैं एक कजरी के, बस इसके आगे कुछ अपनी पंक्तियाँ जोड़ रहा हूँ )
बरसन लागी बदरिया रूम झूम के ...
सूरज गुम है चंद भी गुम है
नाचती है बिजुरिया झूम झूम के ....
राम भी भीगें श्याम भी भीगें
भीगे सारी नगरिया झूम झूम के
प्यास बुझी और जलन गई रे
चहके कारी कोयलिया झूम झूम के
दुख भी बरसे सुख भी बरसे
भीगती है चदरिया झूम झूम के
हर सावन ये यूं ही बरसे
बीते सारी उमरिया झूम झूम के
....रजनीश (25.06.2011)