Thursday, June 20, 2013

ये तय नहीं ...


तय है कि, धरती का सूरज
निकले है पूरब से
पर मेरा भी सूरज, पूरब से निकले
ये तय नहीं....

तय है कि, रात के बाद
आती है एक सुबह
पर हर रात की , एक सुबह हो,
ये तय नहीं....

तय है कि, पानी भाप होकर
बन जाता है बादल
पर उमड़-घुमड़ कर यहीं आ बरसे  
ये तय नहीं....

तय है कि, बिन आँखों के
नज़ारा दिख नहीं सकता
पर आंखों से सब दिख जाएगा
ये तय नहीं ....

तय है कि, ज़िंदगी पूरी हो
तो आ जाती है मौत,
पर मौत से पहले मौत ही ना हो
ये तय नहीं ....

तय है कि, ज़िंदगी पूरी हो
तो आ जाती है मौत,
पर मौत होने से कोई मर ही जाए
ये तय नहीं ....

तय है कि, मेहनत का फल
मीठा होता है
पर हर मेहनत का फल निकले
ये तय नहीं...

ये तय है कि, प्यार भरी हर अदा
खूबसूरत होती है
पर खूबसूरत अदा प्यार ही होगी  

ये तय नहीं ...
...........रजनीश (20.06.2013)

Sunday, June 16, 2013

नई बारिश



मुझे याद है
वो सुलगती हुई
एक सुनसान दोपहर
जब मैं मुखातिब था उस पेड़ से
जो झुलसा हुआ सूखा-सूखा
खड़ा हुआ था राह किनारे
अपनी ज़िंदगी की डोर थामे
पत्तियों ने भी छोड़ दिया था उसका साथ
वीरानी का घर बस गया था
उसकी डालों  पर
और झलकती थी
प्यास हर सिरे से ,
मै पास खड़ा कुछ तलाश रहा था उसमें
एक आईना बन गया था वो पेड़ ,

और आज बारिश हो रही थी
भीगने की तमन्ना
इंतज़ार ही कर रही थी
इन बादलों का
इसी चाहत को साथ लिए
उसी राह से गुजरा
सोचा कुछ  गम ही बाँट लूँ
संग उसी पेड़ के ,
पर वो खेल रहा था
नई हरी पत्तियों संग
पत्तों पर गिरती बूंदों में
सुनाई दे रही थी पेड़ की खिलखिलाहट
हवाओं में झूम रहा था
पानी में तरबतर वो पेड़
न थी कोई वीरानी न थी तनहाई
अधूरी प्यास भी नज़र नहीं आई
और एक आईना टूट कर
वहीं  बिखरा पड़ा था जमीन पर
वही बारिश मुझ पर भी गिरी
पर  भिगा ना सकी थी मुझे
.....रजनीश (16.06.2013)



   

Thursday, June 6, 2013

कार्बन फुट-प्रिंट और फूड-प्रिंट

1. कार्बन फुट-प्रिंट 
चलते रहने का नाम है ज़िंदगी  
एक रास्ते पर चलने का सिलसिला
हर कदम पर एक नई चुनौती
हर मील के पत्थर पर लिखी एक दास्तान
बढ़ते कदम छोडते हैं
धूल की चादर पर
एक इतिहास
एक छाप

जंगलों को काटते हुए
जब से बनाया है रास्ता
बन रही है मेरे हर कदम पर  
एक काली जहरीली छाप
एक अभिशाप
जमीन के सीने पर
मेरा कार्बन फुट-प्रिंट
जिसका कालापन
उड़कर छा जाता है 
मेरी ही आँखों पर 
सांसें भी रुँधने लगती हैं जिससे
डगमगाने लगते हैं कदम
बैठ जाता हूँ सुस्ताने लगता हूँ 
एक फटी हुई हरी चादर पर 

रास्ते को घेरे एक हरी चादर
जिस पर सिसकते हैं ज़ख्म
इतने सारे, कि हरा रंग ही हो गया मटमैला
और टुकड़े-टुकड़े चादर कुछ खो सी गई है 
अपनी जैसी ही पर एक बेजुबान ज़िंदगी की 
डगालें काट-काट कर 
कितनी वीरनियाँ बो दी हैं मैंने चारों ओर
और जहर मिला दिया है नदिया में
कि अब बादलों की आँखों से
गिरने लगा है तेज़ाब

मील के पत्थर पे सुस्ताते हुए
एक नया पौधा लगाता हूँ
धुआँ कुछ छँटता है
रास्ता कुछ साफ होता है
मैं नज़र आने लगता हूँ मुझे 
दिखने लगती है ज़िंदगी 
मेरी ज़िंदगी सीमित नहीं मेरे तक
मेरी साँसे तो उस पेड़ की हैं
जो रास्ते के किनारे 
एक हरी चादर लिए 
देता है मुझे आसरा
मेरा ही हिस्सा है वो

अपनी ही शाखें काटते-काटते
आखिर कितनी दूर जा सकूँगा मैं
फिर कुछ मोड लेता हूँ अपना रास्ता
और फिर उसी पुराने रास्ते पर आ जाता हूँ
जो कायनात ने बनाया था कभी मेरे लिए
करता हूँ कोशिश
ना भटकूँ , ना भूलूँ अपनी राह
ना उतरूँ अपने रास्ते से
ताकि कम से कम लगे कालिख
जी सकें सभी 
और कम से कम

फैलें मेरे कार्बन फुट-प्रिंट..........  

2. फूड-प्रिंट 

दाने दाने पे लिखा है खाने वालों का नाम,
पर किसी दाने पर नहीं, ऐसे भी लाखों नाम ।

जिन दीवारों के भीतर अनाज सड़ा करते हैं,
उन दीवारों के सहारे पड़े भूखे मरा करते हैं ।

चांदी की तश्तरी में वो इतनी छोडते हैं जूठन,  
एक परिवार की मिट जाए जिससे पेट की अगन ।

एक पेड़ ही लगाओ कि कम हो जाए कार्बन फुट-प्रिंट,
सोच समझ के खाओ अन्न बच जाए घटे फूड-प्रिंट ॥  
.......रजनीश ( 05.06.2013 )

World  Environment  Day , 5th  June   के अवसर  पर 
संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस पर्यावरण के
 प्रति वैश्विक स्तर  पर राजनितिक और सामाजिक जागृति
 लाने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत १९७२ ई। में ५ जून से १६ जून तक
 संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलनसे हुई। 
(विकीपीडिया  से साभार)







The theme for this year’s World Environment Day celebrations is Think.Eat.Save. Think.Eat.Save is an anti-food waste and food loss campaign that encourages you to reduce your foodprint. According to the UN Food and Agriculture Organization (FAO), every year 1.3 billion tonnes of food is wasted. This is equivalent to the same amount produced in the whole of sub-Saharan Africa. At the same time, 1 in every 7 people in the world go to bed hungry and more than 20,000 children under the age of 5 die daily from hunger.  

Monday, May 27, 2013

जैव विविधता










सूरज की श्वेत किरणों में
समाये हैं सब रंग
किरणों के अभाव में है
काला भयावह अंधेरा
श्वेत और काले आयामों के बीच
सांस लेती है एक खूबसूरत तस्वीर
सूरज चलाता है ब्रश
मिला सब रंगों को इक संग
श्वेत किरणें बरसती
धरती के कैनवास पर
और सांस लेते रंग चहुं ओर
बिखेरते इंद्रधनुषी छटा
एक ऐसा कैनवास 
जो फैला जल थल और नभ पर 
सुंदरता जन्म लेती है
इस विविधता में 
और साँसे लेता है जीवन
अपने असंख्य स्वरूपों में
एक रंग का अस्तित्व और
उसकी सुंदरता
दूसरे रंग के होने में है
हर रंग जरूरी है
प्रकृति का हर रूप जरूरी है
संगीत की पूर्णता में
लगता है हर सुर
सुर हैं स्पंदन हृदय का
जीवन का अंतरनाद
हर तरंग हर ताल हर स्वर
जुड़े है ज़िंदगी के रूपों से
जीवन संगीत है
हर सुर जरूरी है
जीवन का हर रूप जरूरी है
जीवन के पल रंगबिरंगे 
विशिष्ट गंधों से सुवाषित
अपनी सुर ताल में नाचते
बनाते तस्वीर एक जीवंत
सूरज ने दी श्वेत किरणें
ताकि मिले सब रंग
ना रह जाए तस्वीर अधूरी
इसलिए कोशिश करें
बटोरें बचाएं हर रंग
ताकि तस्वीर बने पूरी

.......रजनीश (27.05.2013)

बायोडायवर्सिटी यानि 
"जैव विविधता " को समर्पित 
The International Day for Biological Diversity 
(or World Biodiversity Day) is a United Nations–
sanctioned international day for the promotion of biodiversity issues

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