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Tuesday, May 1, 2018

आंखों देखी

उनकी बातों मेँ अपना सँसार देखा है
उन्हें जब भी देखा यार देखा प्यार देखा है

सुना है बचपन भगवान का चेहरा होता है
उसी चेहरे पे दरिंदों का अत्याचार देखा है

जो देखकर भी अनदेखा किया करती थीं
आज उन  बेफिक्र आखों में इन्तज़ार देखा है

ईमान की तलाश हमें ले गई जहाँ जहाँ
वहाँ इन्सानियत की खाल में भ्रष्टाचार देखा है

खुद को बचा रखने  बेच देते हैं खुद को
जहाँ अरमानों के सौदे ऐसा बाजार देखा है

इंसानियत के मरने की खबर बड़ी पुरानी है
पर मिल जाती है जिंदा ये चमत्कार देखा है

बीते वक्त को   पुकार देखा ललकार देखा
कभी लौटते कारवां को कभी सिर्फ गुबार देखा है

......रजनीश  (12.05.18)

Monday, September 30, 2013

अब ...क्या कहें


प्यार क्या है , क्या कहें
तकरार क्या है , क्या कहें

राह सूनी, ना पैगाम कोई  
इंतज़ार क्या है , क्या कहें

हैं ना वो, ना तस्वीर उनकी
दीदार क्या है, क्या कहें

थोड़ी फकीरी , है मुफ़लिसी भी
बाज़ार क्या है, क्या कहें

दुश्मन नहीं, ना दोस्त कोई
तलवार क्या है, क्या कहें

दिल में दर्द, है सर भी भारी
बीमार क्या है, क्या कहें

घर नहीं, ना शहर कोई
दीवार क्या है, क्या कहें

जुबां कहती, निगाहें चुप हैं
इज़हार क्या है, क्या कहें

हर गली बस बैर मिलता
प्यार क्या है, क्या कहें 
......रजनीश (30.09.13)
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