एक धारा
बहती हुई
रेत पत्थरों के समंदर में
बिखर जाती है
टूट जाती है
खंड-खंड हो
खो जाती है
उसका रास्ता ही
बन जाता है
उसका दुश्मन
उसके हमसफर ही
बन जाते हैं
उसके लुटेरे
और एक जलमाला
पैदा होते होते
वाष्पित हो जाती है
एक धारा
बूंद-बूंद बढ़ती है
और धाराओं को मिलाती
पाटों को सींचती
जीवन बांटती
पहाड़ों को चीरती
सपने बसाती
समंदर हो जाती है
उसका रास्ता ही
उसे बनाता है
अमृता सरिता तरंगिणी निर्झरिणी
धारा है संभावना
बूंदें है शक्ति का संचय
बहने की ललक है ऊर्जा
रास्ता है नियति
प्रवाह की दिशा
लिख देती है
धारा का पूरी कहानी
पर मुड़ सकती है धारा
बदल सकता है
उसके हाथ की लकीरों का मिजाज
बदला जा सकता है उसका रूप
बदला जा सकता है
रास्ता धारा का
ताकि बदल सके बना सके वो
अनगिनत जीवनों का भविष्य
ऐसी एक धारा कहलाती है यौवन ...
...रजनीश (20.02.2014)
National Youth Day
12 January को समर्पित
क्या हो गया
कहाँ जा रहे हम
असहिष्णुता के रास्ते
अहंकार रथों पर
सब कुछ अपने कब्जे में करते
पूरे रास्ते को घेर चलते
अपनी सड़क
अपने कदम
थोड़ी भी जगह नहीं
औरों के लिए
अपनी ढपली
अपना राग
अपनी सोच
अपनी बात
अपने समीकरण
अपना दर्शन
अपना विचार
अपनी बिसात
आत्म मुग्ध
आत्म केन्द्रित
कदम कदम
बस अपना स्वार्थ
कदम कदम
छिद्रान्वेषण
कदम कदम
आलोचना
कदम कदम
ईर्ष्या
कदम कदम
प्रतिस्पर्धा
क्या यही है सच
क्या यही है सही
क्या रास्ते होते ही हैं
अकेले और बस खुद के लिए
क्या यही है प्रारब्ध
क्या यही है नियति
क्या कोई और रास्ता नहीं ?
इसी रास्ते पर
यह भी लिखे देखा
स्वतन्त्रता /प्रगति /उन्नति
विश्वास नहीं होता !
शायद पत्थर
गलत लगा गया कोई
इतना संकरा कंटीला रास्ता
कैसे जुड़ा हो सकता है
इन शब्दों से ......................
रजनीश ( 13.02.2014)
बस जाने वाला है इक साल
बस आने वाला है इक साल
चढ़ गई एक और परत
वक़्त की हर तरफ़
कुछ सूख गए पेड़ों और
कुछ नई लटकती बेलों में
बस कुछ खट्टी मीठी यादें
बाकी सब , पहले जैसा ही हाल
बस जाने वाला है इक साल
बस आने वाला है इक साल
एक बारिश सुकून की
धो गई कुछ ज़ख़्म इस बरस
कुछ अरमान ठिठुरते रहे
कड़कड़ाती ठंड में सहमे
चढ़ते उतरते रहे मौसम के रंग
जवाबों में फिर मिले कुछ सवाल
बस जाने वाला है इक साल
बस आने वाला है इक साल
....रजनीश (16.12.2012)
repost
नव वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ ....
चलो खोजें
सोना रे, सोना रे, सोना रे
ऐसा मौका
ना हाथ से खोना रे
मैंने कहा
यहीं नीचे गड़ा है
सोचो मत,
ढूंढो
इसे यहीं होना रे
पैसों पे मरती है ये
पैसों से चलती है ये
सोना हो साथ तो
सलाम करती है ये दुनिया
सोना खोजो
गड्ढे खोदो
गहरे जाओ इसे यहीं होना रे
चलो खोजें ...
कितने गड्ढे किए
कितने सपने देखे
ना सोना मिला
कहीं ना खजाना दिखा
अरे खुद में झाँको
अपने अंदर
गहरे जाओ इसे वहीं होना रे
चलो खोजें
सोना रे सोना रे सोना रे
ऐसा मौका
ना हाथ से खोना रे
मैंने कहा
यहीं नीचे गड़ा है
सोचो मत,
ढूंढो
इसे यहीं होना रे ...
....रजनीश (31.10.2013)
पुनः पधारकर अनुगृहीत करें .....