Sunday, April 19, 2015

छोटी सी बात


एक हथेली पर
रखे हुए कई बरसों से
ज्यादा भारी हो जाता है
कभी कभी
दूसरी हथेली पर रखा
एक पल

पैरों से टकराते
अथाह सागर से
बड़ी हो जाती है
कभी कभी
अपने भीतर महासागर लिए
कोने से छलक़ती
...एक बूंद

खुले आकाश में
भरी संभावनाओं सी
अनंत हवा से
कीमती हो जाती है
कभी कभी
जीवन की छोटी सी
...एक सांस

बड़े-बड़े
दरख्तों की छांव से
ज्यादा सुकून देता है
कभी कभी
छोटा सा
...एक आँचल

आसमान छूते बड़े
सुनहरे महलों से
ज्यादा जगह लिए होता है
कभी कभी
मुट्ठी बराबर
...एक दिल

ज़िंदगी की बड़ी
उलझन भरी बातों से
बड़ी हो जाती है
कभी कभी
छोटी सी
...एक बात
....रजनीश (19.04.15)

Wednesday, April 15, 2015

एक वक़्त ऐसा भी

एक वक्त
ऐसा भी होता है
जब दिन गुजरता जाता है
घड़ी की सुई की तरह
बिना ठहरे कहीं भी कुछ घड़ी

बस कोल्हू की मानिंद
ज़िंदगी की सुई एक दायरे में
घूमती चली जाती है
जैसे पंखों को फैलाये
बिना फड़फड़ाए
तैरता हो एक बाज हवा मेँ

कुछ ठहरता नहीं
पर ज़िंदगी ठहर जाती हो जैसे
एक ऐसा ठहराव
जिसमें सुकून नहीं
जिसमें आराम नहीं
जिसमें पड़ाव नहीं
जिसमें कुछ रुकता नहीं
और फिर ये वक़्त
एक आदत बन जाता है

.......रजनीश  (15.04.15)

Sunday, March 22, 2015

हर दिन एक कहानी


हर दिन एक कहानी 
लम्हा-दर-लम्हा 
लिखती ज़िंदगानी 
हर दिन एक कहानी

थोड़ी सी आरजू थोड़े से अरमां
थोड़ी सी प्यास थोड़ा सा पानी
थोड़ी सी कसमें थोड़े से वादे
थोड़ी सी नई थोड़ी पुरानी
हर दिन एक कहानी

थोड़ी सी जीत थोड़ी सी हार 
थोड़ा सा प्यार थोड़ी तकरार
थोड़ा सा गम थोड़ी खुशी
थोड़ी गुलामी थोड़ी मनमानी
हर दिन एक कहानी

थोडा सा दर्द थोड़ा सा जोश
थोड़ी मदहोशी थोड़ा सा होश
थोड़ी बातूनी थोड़ी खामोश  
थोड़ी अनजानी थोड़ी पहचानी
हर दिन एक कहानी

थोड़ी मोहब्बत थोड़ी इबादत
थोड़ी हिमाकत थोड़ी शरारत
थोड़ी बगावत थोड़ी अदावत
थोड़ी तेरी थोड़ी मेरी जुबानी
हर दिन एक कहानी

थोड़ा न थोड़ा जादा न जादा 
कभी आधा पूरा कभी पूरा आधा
थोड़ी सी पूरी थोड़ी अधूरी
थोड़ी संजीदा थोड़ी बेमानी
हर दिन एक कहानी

...........रजनीश ( 22.03.15)

Sunday, March 8, 2015

बस एक दिन


बस एक दिन
कर दिया उसके नाम
जिसका एहसानमंद है
मेरा हर दिन

बस एक दिन
क्यूँ मनाता हूँ उसका उत्सव
जिसकी वजह से उत्सव
मेरा हर दिन

बस एक दिन
करता हूँ बखान जिसके वजूद का
जिसकी देन है मेरा वजूद
मेरा हर दिन

बस एक दिन
याद करता हूँ जिसकी शक्ति
उस ऊर्जा के सहारे है
मेरा हर दिन

बस एक दिन
उसका जो करता है सब पूरा
जिसके बिना अधूरा
मेरा हर दिन

बस एक दिन
आधी कायनात के लिए
जिसके साये में गुजरता
मेरा हर दिन


बस एक दिन ....
.....रजनीश (08.03.15).....
.........अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 
पुनः पधारकर अनुगृहीत करें .....