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Thursday, February 5, 2015

हसरतें



इक रास्ता जो था मिला, इक रास्ते में खो गया
इक सपना जो था दिखा, इक सपने में खो गया

प्यार की बगिया लगाने, बनाई थीं कुछ क्यारियाँ
बीज नफ़रत के न जाने, कौन उनमें बो गया

कुछ रेत ही मिल सकी, बनाया था इक आशियाँ
वो किनारा भी मेरा , समंदर का पानी धो गया

उसकी ख़िदमत की बड़ी हसरत से की तैयारियां
कहाँ रुकना था उसे बस ये आया और वो गया

सोचा था चलो एक चाँद है संग ऊपर आसमां
देखने बैठा था उसे , वो बादलों में खो गया

………..रजनीश (05.02.15)

Sunday, January 25, 2015

चलो कुछ लिखा जाए


जुबां पर लफ्ज जब रुक जाएँ
तो आए लिखने का मौसम
दिल को एक खयाल जब सताए
तो आए लिखने का मौसम
जब कोई ज़ख्म कुरेद जाए
तो आए लिखने का मौसम
वो जाम आँखों से जब पिलाए
तो आए लिखने का मौसम
जब एक लम्हा ठहर जाए
तो आए लिखने का मौसम
जब वक्त से बिछड़ जाएँ
तो आए लिखने का मौसम
जब मनचाहा मिल ना पाए
तो आए लिखने का मौसम
जब एक हसरत पूरी हो जाए
तो आए लिखने का मौसम
दिल में जब तनहाई उतर आए
तो आए लिखने का मौसम
दिल से जब दिल मिल जाए
तो आए लिखने का मौसम

...........रजनीश (25.01.15)
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