Sunday, March 24, 2024
होली
Friday, October 30, 2020
इम्यूनिटी
Wednesday, October 28, 2020
जरूरतों का गणित
Monday, October 26, 2020
अच्छा - बुरा
Thursday, October 22, 2020
अपेक्षा
Friday, October 16, 2020
बचपन की यादें
Thursday, October 15, 2020
वक्त बीतता गया
Monday, October 12, 2020
कुछ बातें इन दिनों की
Friday, October 2, 2020
मुसीबतें
Sunday, September 27, 2020
कलम और वायरस
Friday, February 28, 2020
तलाश एक रास्ते की
Saturday, February 22, 2020
समझ
न पाने में न होने में
Monday, October 21, 2019
थम गई बारिश
बादल हैं अभी
पर भूमिका अपनी अदा कर
अब बारिश थम गई है
Sunday, September 30, 2018
कुछ आदतें
तब भी दूरियाँ बनाए रखीं
और हम आगवानी के लिए
अपना घर संवारने लगे
बन गई है मसरूफियत
कुछ और नहीं मिला
तो सुकून तलाशने लगे
नहीं करेंगे कभी याद उन्हें
पर तन्हाई ने सताया
तो उन्हें ही पुकारने लगे
Wednesday, September 26, 2018
जो बीत गया
सो बीत गया
कुछ जोड़ लिया
कुछ रीत गया
कुछ हार मिली
कुछ जीत गया
सो बीत गया
कहीं प्रीत मिली
कभी मीत गया
कोई दूर रहा
कोई पीट गया
सो बीत गया
कभी रो लिया
कभी खीझ गया
कुछ अच्छा था
कुछ ठीक गया
सो बीत गया
Wednesday, September 5, 2018
शिक्षक
अब तक जो इंसान ने सीखा
हमें सिखाता है शिक्षक
राह बेहतर हो जाने की
हमें दिखाता है शिक्षक
साक्षर हमें बनाता
देता नया नजरिया शिक्षक
कुछ कर सकने को विद्या में
पारंगत करता है शिक्षक
विद्यादान महादान है
सबसे ऊंचा शिक्षक
करता समाज की सेवा
समाज को यश दिलाता है शिक्षक..
...रजनीश (05.09.18)
शिक्षक दिवस पर
Sunday, August 5, 2018
बारिश और टीवी
टीवी स्क्रीन पर
बार बार आ रहा है
ये मैसेज
देखिए कहीं बारिश
तो नहीं हो रही
आपके टीवी को सिग्नल
नहीं मिल रहा
बारिश के मौसम में
हर दिन की ये कहानी है
बिना टीवी के
सुबहो शाम अब बितानी है
स्क्रीन को ताकता हूँ
इधर उधर से झांकता हूँ
कोई चित्र ही नही
कोई समाचार नही
कोई खबर नहीं
कोई बाजार नहीं
टीवी पर कुछ
दिखता ही नहीं
न घटना न दुर्घटना
न मरना न कटना
न झगड़ा न लड़ाई
न सास न भौजाई
आदत सी थी
हल्ले गुल्ले की
देखकर ये सब
भेजा घूम जाता था
अपनी तकलीफों से परेशान
और परेशान हो जाता था
देखता था ये सब
लगता है
थोड़े से सुकून के लिए
कि बाहर भी बड़ा गम है
नहीं गम सिर्फ मेरे लिए
अब हर रोज की बारिश का
असर नजर आ रहा है
घर पर शोर की जगह
शांति ने ले ली है
टीवी बंद रहता है
और अब तो मजा आ रहा है
पहले दर्द बढ़ता जाता था
अब सुकून आ जाता है
जो टीवी पर जाया हो जाता था
वो वक्त काम आ जाता है
यूं ही होती रहे बारिश
ताकि टीवी बंद रहे
बुद्धू बक्से की रहे छुट्टी
घर में कुछ सुकून रहे
...रजनीश(05.08.18)
Friday, August 3, 2018
अच्छा-बुरा
सिर्फ कहने को कुछ कहने से चुप रहना ही अचछा
इंतजार करते रहने से तो चल निकलना अच्छा
रुक के कुछ पल साथ खुद के बैठ लेना अच्छा
घबराकर रुक जाने से तो गुनगुना लेना अच्छा
सच बस कड़वाहट लाए तब झूठ बोलना अच्छा
Tuesday, July 24, 2018
सीधी सच्ची बातें
है चाहत बहुत जरूरी एक रिश्ता बनाने में
भूलना चाहत का जरूरी एक रिश्ता निभाने में
यूँ तो चुनी थी डगर सीधी सी ही मैंने मगर
आ गये मोड़ कहाँ से इतने मेरे फसाने में
रिश्ते बन गए समझौते जज्बात हैं आँखें मींचे
बढ़े शोरगुल और तन्हाई तरक्कीयाफ्ता जमाने में
खट्टी मीठी कुछ यादें पूरे और टूटने सपने
रिश्तों के ताने बाने कितना कुछ मेरे खजाने में
उनकी हर बात से इत्तेफाक है आदत हमारी
वर्ना दम ही कहाँ था उनके इस नये बहाने में
हरदम मैं अपने साथ खुद को लिए चलता हूँ
इसीलिए डरता ही नहीं कभी भी मैं वीराने में
कितना है किसे नशा क्यूँ इसकी रखूं खबर
उतनी में ही झूमता हूँ मैं जितनी मेरे पैमाने में
......रजनीश (24.07.18)
Sunday, June 17, 2018
पिता
पिता समर्थक
पिता आलोचक
पिता शिक्षक
पिता रक्षक
पिता जनक
...रजनीश (17.06.18)







