Wednesday, September 5, 2018

शिक्षक

अब तक जो इंसान ने सीखा
हमें सिखाता है शिक्षक

राह बेहतर हो जाने की
हमें दिखाता है शिक्षक

साक्षर हमें बनाता
देता नया नजरिया शिक्षक

कुछ कर सकने को विद्या में
पारंगत करता है शिक्षक

विद्यादान महादान है
सबसे ऊंचा शिक्षक

करता समाज की सेवा
समाज को यश दिलाता है शिक्षक..

...रजनीश (05.09.18)
शिक्षक दिवस पर

Sunday, August 5, 2018

बारिश और टीवी

टीवी स्क्रीन पर
बार बार आ रहा है
ये मैसेज
देखिए कहीं बारिश
तो नहीं हो रही
आपके टीवी को सिग्नल
नहीं मिल रहा

बारिश के मौसम में
हर दिन की ये कहानी है
बिना टीवी के
सुबहो शाम अब बितानी है

स्क्रीन को ताकता  हूँ
इधर उधर से झांकता हूँ
कोई चित्र ही नही
कोई समाचार नही
कोई खबर नहीं
कोई बाजार नहीं

टीवी पर कुछ
दिखता ही नहीं
न घटना न दुर्घटना
न मरना न कटना
न झगड़ा न लड़ाई
न सास न भौजाई

आदत सी थी
हल्ले गुल्ले की
देखकर ये सब
भेजा घूम जाता था
नी तकलीफों से परेशान
और परेशान हो जाता था

देखता था ये सब
लगता है
थोड़े से सुकून के लिए
कि बाहर भी बड़ा गम है
नहीं गम सिर्फ मेरे लिए

अब हर रोज की बारिश का
असर नजर आ रहा है
घर पर शोर की जगह
शांति ने ले ली है
टीवी बंद रहता है
और  अब तो मजा आ रहा है
पहले दर्द बढ़ता जाता था
अब सुकून आ जाता है
जो टीवी पर जाया हो जाता था
वो वक्त काम आ जाता है

यूं ही होती रहे बारिश
ताकि टीवी बंद रहे
बुद्धू बक्से की रहे छुट्टी
घर में कुछ सुकून रहे

...रजनीश(05.08.18)

Friday, August 3, 2018

अच्छा-बुरा

हर वक्त चुप रहने से कुछ कह देना ही अच्छा
सिर्फ कहने को कुछ कहने से चुप रहना ही अचछा

सही वक्त के इंतजार में चला जाता है सारा वक्त
इंतजार करते रहने से तो चल निकलना अच्छा

हर वक्त भागमभाग है बैचेनी और बदहवासी
रुक के कुछ पल साथ खुद के बैठ लेना अच्छा

दिल का गाना बेसुरा नहीं जज्बात में डूबा होता है
घबराकर रुक जाने से तो गुनगुना लेना अच्छा

सच को सच सच कहना नामुमकिन तो नहीं मगर
सच बस कड़वाहट लाए तब झूठ बोलना अच्छा

                                        ...रजनीश (03.08.18)

Tuesday, July 24, 2018

सीधी सच्ची बातें

है चाहत बहुत जरूरी एक रिश्ता बनाने में
भूलना चाहत का जरूरी एक रिश्ता निभाने में

यूँ तो चुनी थी डगर सीधी सी ही मैंने मगर
आ गये मोड़ कहाँ से इतने मेरे फसाने में

रिश्ते बन गए समझौते जज्बात हैं आँखें मींचे
बढ़े शोरगुल और तन्हाई तरक्कीयाफ्ता जमाने में

खट्टी मीठी कुछ  यादें पूरे और टूटने सपने
रिश्तों के ताने बाने कितना कुछ मेरे खजाने में

उनकी हर बात से इत्तेफाक है आदत हमारी
वर्ना दम ही कहाँ था उनके इस नये बहाने में

हरदम मैं अपने साथ खुद को लिए चलता हूँ
इसीलिए डरता ही नहीं कभी भी मैं वीराने में

कितना है किसे नशा क्यूँ इसकी रखूं खबर
उतनी में ही झूमता हूँ  मैं जितनी मेरे पैमाने में

                                             ......रजनीश  (24.07.18)

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