Thursday, October 31, 2013

कहाँ है सोना ...


चलो खोजें
सोना रे, सोना रे, सोना रे
ऐसा मौका
ना  हाथ से खोना रे
मैंने कहा
यहीं नीचे गड़ा है
सोचो मत,
ढूंढो
इसे यहीं होना रे

पैसों पे मरती है ये
पैसों से चलती है ये
सोना हो साथ तो
सलाम करती है ये दुनिया
सोना खोजो
गड्ढे खोदो
गहरे जाओ इसे यहीं होना रे
चलो खोजें ...

कितने गड्ढे किए
कितने सपने देखे
ना  सोना मिला
कहीं ना खजाना दिखा
अरे खुद में झाँको
अपने अंदर
गहरे जाओ इसे वहीं होना रे

चलो खोजें
सोना रे सोना रे सोना रे
ऐसा मौका
ना हाथ से खोना रे
मैंने कहा
यहीं नीचे गड़ा है
सोचो मत,
 ढूंढो
इसे यहीं होना रे ...
....रजनीश (31.10.2013)




3 comments:

HARSHVARDHAN said...

सुन्दर पंक्तियाँ और रचना।।

नई कड़ियाँ : भारत के महान वैज्ञानिक : डॉ. होमी जहाँगीर भाभा

"प्रोजेक्ट लून" जैसे प्रोजेक्ट शुरू होने चाहिए!!

रविकर said...

गंडा बाँधे फूँक कर, थू थू कर ताबीज |
गड़ा खजाना खोद के, रहे हाथ सब मींज |

रहे हाथ सब मींज, मरी चुहिया इक निकली |
करे मीडिया मौज, उड़ा के ख़बरें छिछली |

रकम हुई बरबाद, निकलते दो ठो हंडा |
इक तो भ्रष्टाचार, दूसरा प्रोपेगंडा |

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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