Tuesday, May 1, 2018

आंखों देखी

उनकी बातों मेँ अपना सँसार देखा है
उन्हें जब भी देखा यार देखा प्यार देखा है

सुना है बचपन भगवान का चेहरा होता है
उसी चेहरे पे दरिंदों का अत्याचार देखा है

जो देखकर भी अनदेखा किया करती थीं
आज उन  बेफिक्र आखों में इन्तज़ार देखा है

ईमान की तलाश हमें ले गई जहाँ जहाँ
वहाँ इन्सानियत की खाल में भ्रष्टाचार देखा है

खुद को बचा रखने  बेच देते हैं खुद को
जहाँ अरमानों के सौदे ऐसा बाजार देखा है

इंसानियत के मरने की खबर बड़ी पुरानी है
पर मिल जाती है जिंदा ये चमत्कार देखा है

बीते वक्त को   पुकार देखा ललकार देखा
कभी लौटते कारवां को कभी सिर्फ गुबार देखा है

......रजनीश  (12.05.18)

1 comment:

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ज़िन्दगी का बुलबुला - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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