Monday, October 21, 2019

थम गई बारिश

अब बारिश थम गई है
सूरज अब भी छुपा छुपा सा
बादल हैं अभी
पर भूमिका अपनी अदा कर
अब बारिश थम गई है

कहीं महीनों से इंतज़ार था
भिगाया भी बारिश ने
पर कुछ रह सा गया
पूरा भीगा नहीं कोई
बादल हैं अभी 
पर प्यासा छोड़ कर 
अब बारिश थम गई है

कहीं होती रही महीनों
बहा ले गई सब कुछ
थमने का था इंतजार 
बारिश होती रही
बादल हैं अभी 
पर सब कुछ बहाकर 
अब बारिश थम गई है

किसी के हिस्से
उतनी ही आई 
जितना उसने चाहा 
बादल हैं अभी
पर थोड़ा डराकर 
अब बारिश थम गई है

.....रजनीश (21.10 19)






4 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 22 अक्टूबर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

मन की वीणा said...

बहुत सुंदर सार्थक प्रस्तुति।
यथार्थ के साथ।

सुशील कुमार जोशी said...

लाजवाब

Jyoti khare said...

बहुत सुंदर सृजन

पुनः पधारकर अनुगृहीत करें .....