Sunday, September 18, 2011

सपनों का हिसाब-किताब

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कल रात बैठा लेकर
सपनों का हिसाब किताब
अरमान, तमन्नाएँ , सपने
और हासिल का कच्चा चिट्ठा लिए
सोचता रहा कहाँ खर्च किया
पल दर पल खुद को
और कब-कब बटोरी दौलत
बताने लगे मेरे बही खाते
पन्ने दर पन्ने ...
ढेर सारे  पल लग गए
सपने देखने में,
न जाने कितने पन्ने भरे मिले
सपने में ही जीने की दास्ताँ लिए, 
बहुत से पल छोड़ने पड़े हैं
दूसरों के सपने सच करने ,
अरसे लगे कई बार 
धुंधले अधपके
सपनों को बार बार देखने
और उन्हें कई बार अधूरा जीने में,
कई मौसम चले गए 
टूटे बिखरे सपनों को समेटने में
फिर कुछ सपने जो मैं देखता हूँ
दूसरे की आँखों से
उन्हें भी देनी पड़ी है जगह
ज़िंदगी के पन्नों पर,
बैठ  तनहाई में गुजारे  कुछ पल  कई बार
याद करने कुछ भूले हुए सपने,
कई बार आँधी-तूफान और बारिश में
सपनों की पोटली सम्हालने
और बचाने में वक्त लगा
कड़ी धूप में सपनों को
बचाना भी पड़ा  झुलसने से,
न जाने कितनी  बार बाढ़ में
सपनों को दबाये हुए बगल में
मीलों और बरसों बहता रहा हूँ ,
काफी वक्त लग जाया करता है
पुराने रद्दी और सड़ते सपनों को
छांटने और फेंकने में,
कुछ सपने कभी सच हुए तो
हिसाब में उन्हें जीने का वक्त ही कम निकला,
कई बार ऊब भी हुई है सपनों से
तब गठरी को छोड़कर बस खिड़की से
नीले अनंत आसमान में देखने का दिल किया,
हिसाब लगा कर देखा
तैयारी या इंतज़ार में रहे अक्सर
और हर बार कुछ पल ही जिये
सपनों को सच होता देखते
हाँ ,सपनों का खाता खत्म  ना हुआ ...
....रजनीश (18.09.11)

21 comments:

रचना दीक्षित said...

सपनो में जीने का और उससे जीवन सवारने का सुंदर प्रयास. सुंदर भाव लिए हुए खूबसूरत प्रस्तुति.

संजय भास्कर said...

वाह कितना सुन्दर लिखा है आपने, बहुत सुन्दर जवाब नहीं इस रचना का........ बहुत खूबसूरत.......

रविकर said...

बहुत सुन्दर --
प्रस्तुति ||
बधाई |

अनुपमा त्रिपाठी... said...

sapne aur sach jeeti ...bahut sunder abhivyakti ....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बेहिसाब सपने ...

वन्दना said...

यही है सपनो का फ़लसफ़ा…………सुन्दर प्रस्तुति।

रश्मि प्रभा... said...

sapno ka khoobsurat sa taana baana

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 19-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

प्रवीण पाण्डेय said...

स्वप्नों की अपनी दुनिया है, हम वहाँ जाकर खो जाते हैं।

ZEAL said...

very appealing...

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत बढ़िया सर!
----
कल 19/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Dr Varsha Singh said...

एक अलग ही भाव-संसार में ले जाती सुंदर कविता !

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना| धन्यवाद|

sushma 'आहुति' said...

भावपूर्ण रचना....

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

गहन अभिव्यक्ति ....प्रभावित करती पंक्तियाँ

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') said...

अच्‍छा केलकुलेशन।

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कभी देखा है ऐसा साँप?
उन्‍मुक्‍त चला जाता है ज्ञान पथिक कोई..

Anita said...

बहुत गहराई से सपनों को विश्लेषित किया है आपने सपने आखिर सपने ही होते है... कभी भ्रम कभी खुशी का अहसास देते है..बस इससे ज्यादा कुछ नहीं..

रेखा said...

वाह ...बहुत अच्छा हिसाब लगाया है

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

जिंदगी की संगतियों-विसंगतियों का भावपूर्ण चित्रण
गहन विवेचन .......

दिगम्बर नासवा said...

सपनों का हिसाब किताब ... क्या खोया क्या पाया ... कभी कभी आत्मचिंतन करना सुखद लगता है ..

kanupriya said...

sapne ka hisab kitab...sach hai kuch adhure kuch poore ase hi to hote hain sapne.pyari rachna...

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