Sunday, October 16, 2011

कुछ तकलीफ़ें

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तकती रह गईं खिड़कियाँ धूप का आना ना हुआ
फंस के रह गई परदों में रात का जाना ना हुआ

दुनियादारी के खूब किस्से गली-गली चला करते है
कोशिश भी की पर कहीं ईमां बेच आना ना हुआ

चाहत हमें कहती रही  दो उस सितमगर को जवाब
खुद की नज़रों में दिल से कभी गिर जाना ना हुआ

दिल पे चोट लगती रही  अपना खून भी जलाया हमने
पर नादां नासमझ ही रहे थोड़ा झुक जाना ना हुआ

वक़्त हमें समझाता रहा  दरिया के किनारे खड़े रहे
उलझे हुए टूटे धागों को पानी में छोड़ आना ना हुआ

माना है अपने हाथों में अपनी तक़दीर लिखते हैं  हम
फिर भी कुछ मांगने ख़ुदा के दर ना जाना ना हुआ

....रजनीश ( 16.10.2011)

22 comments:

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

सुन्दर रचना....अर्थपूर्ण शेर

Onkar said...

Bahut khoob

रचना दीक्षित said...

क्या खूब शेर कहे हैं. आभार.

प्रवीण पाण्डेय said...

बेहतरीन रचना।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

दिल पे चोट लगती रही अपना खून भी जलाया हमने
पर नादां नासमझ ही रहे थोड़ा झुक जाना ना हुआ

बहुत खूबसूरत गज़ल

Jyoti Mishra said...

Really love the way u write :)
last verse was superb !!

POOJA... said...

bahut hi badhiya Ghazal...

वन्दना said...

सभी शेर एक से बढकर एक हैं।

निवेदिता said...

बहुत खूबसूरत गज़ल ......

रश्मि प्रभा... said...

bahut achhi gazal

देवेन्द्र पाण्डेय said...

मतले की मौलिकता प्रभावित करती है। यह भाव भी अनूठा है, अभिव्यक्ति भी लाज़वाब।

डॉ.सोनरूपा विशाल said...

उम्दा शेर हैं ..........

sushma 'आहुति' said...

तकती रह गईं खिड़कियाँ धूप का आना ना हुआ
फंस के रह गई परदों में रात का जाना ना हुआ...बहुत खूब....

सागर said...

behtreen gazal...

mridula pradhan said...

lajabab......

Anita said...

....इसी कशमकश में गुजरती रही जिंदगी
मेरे दर पे आजतलक उसका आना न हुआ

बहुत उम्दा गजल !

योगेश शर्मा said...

behtareen ...especially the last one :))

अनुपमा पाठक said...

सुन्दर अभिव्यक्ति!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...




फंस के रह गई परदों में रात का जाना न हुआ …
वाह ! बहुत ख़ूब कहा !

रजनीश जी
कमाल करते हैं आप भी :) बहुत अच्छे !


दीपावली की अग्रिम बधाइयां !
शुभकामनाएं !
मंगलकामनाएं !

-राजेन्द्र स्वर्णकार

दिगम्बर नासवा said...

खूबसूरत गज़ल ... बहुत दम है शेरों में ... ज़माने की बात करते हुवे ..

Kailash C Sharma said...

बहुत खूब ! बेहतरीन गज़ल..

Anonymous said...

great improvement rajneesh, this one is awesome. Abhay kumar

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