Monday, June 13, 2011

एक छुट्टी का दिन

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कुछ यादों की सिलवटें
कुछ उनींदें सपनों की उलझी लटें
कुछ गुफ़्तगू पुराने होते घर से
थोड़ा टीवी के साथ करवटें

कुछ बोरियत भरे लम्हों से लड़ाई
कुछ अहसासों से हाथापाई
कुछ बाहर-भीतर भरी रद्दी की छंटाई
थोड़ी मकड़जालों में फंसी ज़िंदगी की सफाई

कुछ अपनों से बातें
कुछ अपनी बातों की बातें
कुछ चाही-अनचाही मुलाकातें
थोड़ी  वक़्त को थाम लेने  की कोशिशें

कुछ गाने चाय के प्यालों में
कुछ पिछली  अधूरी साँसें
कुछ फिक्र को उड़ाते पलों से यारी
थोड़ी कोशिश खुद को जीने की हमारी

थोड़ी मुहब्बत थोड़ी इबादत
थोड़ी मरम्मत  थोड़ी हजामत
थोड़ा  काम थोड़ा आराम
अलसाई सुबह एक मुट्ठी शाम
...रजनीश (13.06.11)

10 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

छुट्टी का दिन अच्छा बीता ...

रश्मि प्रभा... said...

कुछ गाने चाय के प्यालों में
कुछ पिछली अधूरी साँसें
कुछ फिक्र को उड़ाते पलों से यारी
थोड़ी कोशिश खुद को जीने की हमारी
aapki kalam ghar aur sahaj vatavaran mein dubki laga aati hai, aur sab apna apna sa lagta hai

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

कुछ बोरियत भरे लम्हों से लड़ाई
कुछ अहसासों से हाथापाई
कुछ बाहर-भीतर भरी रद्दी की छंटाई
थोड़ी मकड़जालों में फंसी ज़िंदगी की सफाई

Chhutti ke din ka behtreen shabdik chitran.....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


परखना मत ,परखने से कोई अपना नहीं रहता ,कुछ चुने चिट्ठे आपकी नज़र

--

Ruchika Sharma said...

खूबसूरत छुट्टी

प्‍यारे और मस्‍ती भरे हिन्‍दी एसएमएस

ana said...

bahut achchhi rachana

Dr (Miss) Sharad Singh said...

कुछ गाने चाय के प्यालों में
कुछ पिछली अधूरी साँसें
कुछ फिक्र को उड़ाते पलों से यारी
थोड़ी कोशिश खुद को जीने की हमारी


यथार्थ के धरातल पर रची गयी एक सार्थक सुन्दर रचना....

Anita said...

बहुत सुंदर ! वाह के सिवा क्या कहें...

Jyoti Mishra said...

Holidays... Love even the sound of it.
Beautifully expressed.
Now I am feeling ... Sunday come soon :)

induravisinghj said...

बहुत ही खूबसूरत...

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