Sunday, January 9, 2011

कुछ अहसास ऐसे होते हैं ....

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आप इसे यहाँ मेरी आवाज में सुन सकते हैं ....
कुछ अहसास ऐसे होते हैं ....
जो रहते हैं  बहुत दूर, शब्दों से ,
पर उन्हे छूने  कहीं जाना नहीं होता,
बस यहीं खड़े ,
करना होता है बंद आंखे,
और वो खुद बंधे चले आते हैं ।

कुछ अहसास ऐसे होते हैं ....
जो  नहीं रहते हैं अब यहाँ ,
पर मरते नहीं  कभी, न बिछुड़ते हैं,
साल दर साल, 
जब भी पलाश पर फूल खिलता है ,
वो खुद मिलकर चले जाते हैं ।

कुछ अहसास ऐसे होते हैं....
जो बंधते नहीं किसी धागे से,
जिनका एक चेहरा नहीं होता ,
बस दो पल फुर्सत के निकाल,
करनी होती है बातें आइने से,
वो खुद ही सामने उभर आते हैं।

कुछ अहसास ऐसे होते हैं....
जो कभी जनम नहीं पाते ,
जिनकी किलकारियाँ सुनाई नहीं देती,
ज़िंदगी की इस दौड़ में,
इससे पहले कि  आ सकें  ऊपर,
वो पैरों तले रौंद दिये जाते हैं ।
............रजनीश (09.01.11)

4 comments:

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA said...

निसंदेह ।
यह एक प्रसंशनीय प्रस्तुति है ।
धन्यवाद ।
satguru-satykikhoj.blogspot.com

नीरज बसलियाल said...

खूबसूरत अहसास पिरोये हैं आपने रजनीश भाई | ऐसे ही लिखते रहिएगा ...

ana said...

bahut khubsurati se baya n kiya hai hasaso ko..........good

Sunil Kumar said...

कुछ अहसास ऐसे होते हैं....
जो कभी जनम नहीं पाते ,
जिनकी किलकारियाँ सुनाई नहीं देती,
yah hui na bat bahut sundar ,badhai

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