Saturday, November 27, 2010

जिंदगी

DSCN1677

जिंदगी - एक अनंत प्रवाह ,

हम देखते हैं इसे बहते

हरदम , चश्मा लगाकर /

जिस रंग का चश्मा – उस रंग की जिंदगी /

किसी को लाल पसंद नहीं /

कोई हरा-पीला पसंद करता है /

हर किसी को आज़ादी - चश्मा बदलो - रंग बदलता है/

DSCN1673 पर ये आज़ादी किसी काम नहीं आती /

हम आज़ाद हो ही नहीं पाते ,

मानो , कोई एक चश्मा जैसे

चमड़ी से जुड़ गया हो / और

हम चाहकर भी चश्मा बदल नहीं पाते

...रजनीश

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