Tuesday, November 30, 2010

खोज

021209 279

कोशिश करता रहता हूँ ,

खुद को जानने की,

लगा हूँ एक कोशिश में ,

खुद को समझने की,

सब करते होंगे ये,

जो जिंदा है ,

मरे हुए नहीं करते,

कोशिश का ये रास्ता ,

दरअसल भरा है काँटों से ,

 

बेसिर पैर और अनजानी सी जिंदगी

से बेहतर हैं ये,

जिनकी चुभन से उड़ती है नींद और खुल जाती है आँख ,

ये कांटे दिखाते हैं रास्ता ,

देते हैं हौसला ,

और भरते हैं मुझमें आशा ,

और आगे जाने की और

खुद से बेहतर हो जाने की......

....रजनीश

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