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Monday, February 2, 2015

ख़्वाहिश


मिल जाती जो नज़रें होती मुलाक़ात की ख़्वाहिश
हो जाती गर मुलाक़ात होती है बात की ख़्वाहिश

हो जाता है शामिल रस्में तोड़ने वालों में मौसम
जब बारिश में धूप और होती है ठंड में बारिश

मांग लेते हम भी वही गर दूसरे दर्द नहीं होते
रह जाती है फेहरिस्त में नीचे चाहत की गुजारिश

मिल जाती कामयाबी कुछ हम भी बन जाते  
रह जाती कसर थोड़ी अपनी कौन करे सिफ़ारिश

करते हैं कोशिश कि बढ़ते किसी सफ़र पर कदम
हो जाती है फिर शुरू हमारे सपनों की साज़िश

...........रजनीश (02.02.15)

Saturday, January 24, 2015

दरअसल ....



















था न कोई उस राह , पर इंतजार हम करते रहे
उनको हमसे नफ़रत सही , पर प्यार हम करते रहे    

वक़्त की ख़िदमत में , अक्ल-ओ-दिल से लिए फैसले
और किस्मत के नाम , हर अंजाम हम करते रहे

रिश्ता निभाने खुद को भुला देने से था परहेज़ कहाँ  
बस रिश्ता बनाने का जतन हम करते रहे

बसा जो दिल में था उसे क्या भूला क्या याद किया  
बस खोए हुए दिल की तलाश हम करते रहे

क्या कहें क्या अफसाना क्या मंज़िल क्या ठिकाना
बस एक सफ़र की गुजारिश हम करते रहे

............रजनीश (24.01.15)
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